Wednesday, April 15, 2009

झटके पे झटका, झटके पे झटका आखिर कब तक


झटका मीट शॉप। यह नाम है आने वाले आईपीएल का जो हमनें दिया है। अरे भई इस बेचारी आईपीएल को इतने झटके खाने पड रहे हैं कि इससे बेहतर नाम और कुछ हो ही नहीं सकता है। आने वाले दिनों में और देखते हैं कि इसको क्‍या कुछ सहना पडेगा। 

कमल कान्‍त वर्मा 

झटके पे झटका झटके पे झटका आखिर कब तक। आईपीएल को तो अपने नए सीजन में पता नहीं कितने ही झटके सहनें होंगे। पहले जगह बदलने का झटका, फिर पाकिस्‍तानी खिलाडियों को हटाने का झटका, कभी उनके चुनौती देने का झटका। और इन सभी से निजाद मिली तो अब स्‍टेडियम मै बैठने का ही झटका आईपीएल को लग गया। ये जोर का झटका घीरे से आखिर कब तक लगता रहेगा। आखिर इस आईपीएल को कब तक सहन करने होंगे ये झटके। इतने झटकों से ऐसा लग रहा है जैसे आईपीएल 2 झटका मीट शॉप बन कर रह गई हो। अब कोई ये कहे कि खिलाडियों के बैठने को लेकर भला क्‍या झटका आईपीएल को लगा है। तो हुआ यूं है जनाब कि न्‍यूलैंडस जहां पर आईपीएल के शुरूआती मैच खेले जाने हैं वहां मौजूद सूइटस के सदस्‍यों ने कह दिया है कि वह अपनी जगह खाली नहीं करेंगे। तो भला फिर आपके और हमारे आईपीएल खिलाडी मैदान की सूखी और गीली घास को अपनी बैठने की जगह बनाएंगे क्‍या।

सवाल तो बडा होने के साथ साथ चुनौतीपूर्ण भी है। सूइटस का ख्‍वाब दिखाने वाली आईपीएल के सामनें तो यह नाक कटनें जैसी स्थिति हो गई है। आखिर करे तो क्‍या करे। मगर यदि कोई हमसे पूछे तो हम तो उन सदस्‍यों के ही साथ हैं भई। आखिर कुर्सी का मामला है। भला कोई कैसे छोड दे। कुर्सी है तो सब कुछ है कुर्सी नहीं तो कुछ भी नहीं। आईपीएल ने आज कुर्सी मांगी है कल पता नहीं क्‍या मांग ले, कहना मुश्किल है।

हालाकि मोदी साहब ने अब ने वहां के सदस्‍यों को सूइट खाली करने के लिये कुछ ख्‍वाब दिखाने शुरू कर दिये हैं। वो कहते हैं कि आप टैंट में बैठ जाओ हम तुम्‍हें टिकटें भी फ्री दे देंगे। इसके अलावा खाना भी मुफत मिलेगा। ऐसा लग रहा है कि जैसे भारत में होने वाली किसी रैली में भीड को जुटाने की मंशा से यह बातें कही जा रही हैं। क्‍या आपको ऐसा नहीं लगता है। अब तो खिलाडियों की स्थिति पर एक ताजा तरीन शेर याद आने लगा है। वो कुछ ऐसा है कि फुटपाथ हर सडक का है आशियां हमारा, रहने को घर नहीं है सारा जहां हमारा। देखते हैं कि कुर्सी का यह मामला आखिर किस तरफ जाता है। जैसे भारत में सभी चुनाव के दौरान दूसरे की कुर्सी खींचने में लगे हैं वैसा ही कुछ हाल इन दिनों न्‍यूलैंडस के स्‍टेडियम में चल रहा है। मानों मोदी कह रहें हो यह कुर्सी हमका दे ठाकुर। फिलहाल तो हमारी निगांहें भी इनकी कुर्सी मामले पर है आप भी जरूर निगाह रखियेगा। 

यदि आपको कुछ और लेख पढने हों तो आप मेरे दूसरे ब्‍लॉग www.cricketmerijan.blogspot.com पर जाकर भी पढ सकते हैं ा 

Thursday, April 9, 2009

अब पप्पू की लाज बचाने को सामनें आई है आईपीएल पार्ट टू


आईपीएल से भले ही कुछ विवाद जुडें हों मगर आईपीएल पार्ट टू ने एक काम तो बडा ही अच्‍छा किया है और वह है कि इसनें पप्‍पूओं की लाज रख ली है। अब पप्‍पू सीना ठोक कर चलने के काबिल हो गया है, नहीं तो सभी ने पप्‍पू की जान ले ली थी। उसका जीना मुश्किल कर दिया। घर से बाहर निकलने के लिये भी उसको कई बार सोचना पडता था। इस नेक काम के लिये आईपीएल पार्ट टू का धन्‍यवाद।
कमल कान्‍त वर्मा
पप्‍पू आज इतना फैमस हो गया है कि जहां देखो पप्‍पू का ही जिक्र चल रहा है। अखबार के पन्‍ने हों या फिर टीवी की ऐड सभी में पप्‍पू घुस गया है। मगर सच मानों तो अब मेरा भी मन है कि मैं भी पप्‍पू ही बन जाऊं। अरे पप्‍पू वोट नहीं देता है तो क्‍या हुआ आखिर पप्‍पू अब पप्‍पू तो नहीं रहा है। पप्‍पू तो अब सचिन भी है और द्रविड भी, और बाकी टीम प्‍लेयर भी। आपको नहीं पता है क्‍या इस बात का। अरे भई अब वो दिन दूर नहीं है जब आईपीएल पार्ट टू खेल रहे सारे खिलाडियों को अपने नाम के पीछे पप्‍पू का तमगा लगाना पडेगा क्‍योंकि वह इस बार लोकसभा चुनाव में अपना वोट नहीं डाल पाएंगे। बेचारे ना चाहते हुए भी पप्‍पू बन गए।

मगर अब पप्‍पू बनने पर किसी को कोई अफसोस नहीं होगा। पहले जरूर होता था। पिछले एक या फिर दो साल से जिस तरह से पप्‍पू को बदनाम करने की सोची समझी साजिश रची गई वह तरकीब अब बेकार हो गई है। भला हो इस आईपीएल का जिसनें इन पप्‍पूओं की लाज रख ली। अब तो पप्‍पू बेधडक बाहर निकलकर आएंगे और कहेंगे कि हम पप्‍पूओं कि फैरिस्‍त में अब दुनिया के बेहतरीन क्रिकेट खिलाडी शामिल हो गए हैं। भला यह तो कोई बात नहीं हुई कि चुनाव में पप्‍पू के नाम को ही उछालना शुरू कर दिया कि पप्‍पू वोट नहीं देता, क्‍या आप पप्‍पू बनना चाहोगे। अब कोई कह कर देखे। अरे पप्‍पू वोट नहीं देता है तो क्‍या हुआ।

आखिर पप्‍पू की भी तो कोई इज्‍ज्‍त है। अब किसी को पप्‍पू की इज्‍जत उतारने का कोई हक नहीं है। अब कोई कह कर देखे तो अब तो पप्‍पू पूरी तरह से सिक्‍योर है। क्‍योंकि उसके साथ में भारतीय क्रिकेट टीम के कई बडे नाम जुड गए हैं। यह सारे नाम ऐसे हैं जो हजारों हजार लोगों के लिये एक आर्दश हैं। इसलिये अब पप्‍पू पप्‍पू नहीं रहा है। और वैसे भी तुम्‍हें पता होना चाहिए कि पूरे भारत में कोई एक पप्‍पू नहीं है लाखों पप्‍पू हैं। तभी तो हर बार वोट का प्रतिशत लगातार घट रहा है फिर पप्‍पू को ही क्‍यों बदनाम करते हो भैयया। हम तो एक बात जानते हैं और वो यह है कि पप्‍पू के मन की तो किसी ने नहीं सोची। ना उन्‍होंने जो पप्‍पू को यूं बदनाम कर रहे हैं और ना ही हमारे माननीय चुनाव आयोग ने। यदि ऐसा होता तो भला वह इन पप्‍पूओं को पप्‍पू बनने से रोकने के लिये पहल नहीं करता क्‍या। एक सवाल और यहां पर बार बार मेरे जहन में कबडडी खेल रहा है कि आखिर क्‍या देश में होने वाले चुनाव क्रिकेट बल्‍ले से इतने बौने हो गए कि इस बात की चिंता किसी ने नहीं करी कि लाखों लोगों के ये आदर्श क्रिकेट स्‍टार भला इसमें शामिल कैसे होंगे। नहीं सोची है तो जाने दो जो हुआ अच्‍छा हुआ। हमारे लिये इतना ही काफी है कि आईपीएल पार्ट टू ने पप्‍पूओं की लाज रख ली।