Wednesday, April 4, 2012

भारतीय नौसेना को मिली आईएनएस चक्र



चेन्नई।आईपीएल सीजन 5 के शुरुआती मैच चेन्नई सुपर किंग्स इंडियन और मुंबई इंडियंस के बीच बुधवार को खेला जाएगा। एम ए चिदंबरम स्टेडियम पर होने वाले इस पहले मुकाबले में टूर्नामेंट की दो सबसे मजबूत टीमें आमने सामने होंगी तो आगाज धमाकेदार रहने की पूरी गारंटी रहेगी।
घरेलू मैदान पर खेलने का फायदा महेंद्र सिंह धौनी की टीम को मिलेगी ही जिसके दम पर उसने पिछले दो साल खिताब जीते हैं। इसके लिए उसे मुंबई इंडियंस के खिलाफ जीत के साथ शुरूआत करके अपने तेवर जाहिर करने होंगे। चेन्नई को दो खिताब दिलाने के अलावा एक बार फाइनल और एक बार सेमीफाइनल तक ले जाने वाले धौनी के हिस्से में चैंपियंस लीग खिताब भी है। वह टीम इंडिया के हालिया खराब प्रदर्शन को भुलाकर चेन्नई सुपर किंग्स पर पूरा ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करेंगे। धौनी के अलावा चेन्नई की बल्लेबाजी का दारोमदार सुरेश रैना, एस बद्रीनाथ और मुरली विजय पर होगा। उनके अलावा हरफनमौला रविंदर जडेजा पर भी सभी की नजरें होंगी जिन्हें इंडिया सीमेंट्स की अगुवाई वाली टीम ने 20 लाख डालर में खरीदा है। चेन्नई को सलामी बल्लेबाज माइक हसी और तेज गेंदबाज बेन हिलफेनहास की कमी शुरुआती चरण में खलेगी। दोनों आस्ट्रेलियाई टीम के कैरेबियाई दौरे में व्यस्त होंगे। चोट से उबरे आस्ट्रेलिया के डग बोलिंगर और दक्षिण अफ्रीका के एल्बी मोर्कल तेज आक्रमण की अगुवाई करेंगे जबकि स्पिन का जिम्मा स्थानीय सितारे आर अश्रि्वन के हाथ में होगा।
दूसरी ओर मुंबई इंडियंस नए कप्तान हरभजन सिंह की अगुवाई में खेलेगी। सचिन तेंदुलकर ने कल कप्तानी हरभजन को सौंप दी। कुछ नए खिलाडि़यों के आने के बाद मुंबई की टीम काफी मजबूत लग रही है। पिछले चार साल से खिताब नहीं जीत सकी मुंबई का इरादा इस कमी को अबकी बार पूरा करने का होगा। पिछले साल चैंपियंस लीग जीतने के बाद उसके इरादे बुलंद हैं। मुंबई की बल्लेबाजी की धुरी तेंदुलकर ही होंगे जो सौ अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने का इतिहास रचने के बाद अपने पसंदीदा मैदान पर खेल रहे हैं। अब उन पर से सौवें अंतरराष्ट्रीय शतक का दबाव हट चुका है लिहाजा तेंदुलकर के बल्ले से रनों की आतिशबाजी की पूरी उम्मीद है। रिलायंस समूह की मुंबई टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक और स्पिनर प्रज्ञान ओझा ट्रांसफर विंडो के जरिए आए हैं। मुंबई टीम से हर्शल गिब्स, मिशेल जानसन, राबिन पीटरसन, आर पी सिंह और तिसारा परेरा भी जुड़े हैं। वहीं श्रीलंकाई तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा और मुनफ पटेल टीम के अभिन्न अंग बने हुए हैं। कीरोन पोलार्ड के रूप में मुंबई के पास खतरनाक बल्लेबाज है जो अकेले दम पर मैच का नक्शा पलट सकता है।

Wednesday, April 15, 2009

झटके पे झटका, झटके पे झटका आखिर कब तक


झटका मीट शॉप। यह नाम है आने वाले आईपीएल का जो हमनें दिया है। अरे भई इस बेचारी आईपीएल को इतने झटके खाने पड रहे हैं कि इससे बेहतर नाम और कुछ हो ही नहीं सकता है। आने वाले दिनों में और देखते हैं कि इसको क्‍या कुछ सहना पडेगा। 

कमल कान्‍त वर्मा 

झटके पे झटका झटके पे झटका आखिर कब तक। आईपीएल को तो अपने नए सीजन में पता नहीं कितने ही झटके सहनें होंगे। पहले जगह बदलने का झटका, फिर पाकिस्‍तानी खिलाडियों को हटाने का झटका, कभी उनके चुनौती देने का झटका। और इन सभी से निजाद मिली तो अब स्‍टेडियम मै बैठने का ही झटका आईपीएल को लग गया। ये जोर का झटका घीरे से आखिर कब तक लगता रहेगा। आखिर इस आईपीएल को कब तक सहन करने होंगे ये झटके। इतने झटकों से ऐसा लग रहा है जैसे आईपीएल 2 झटका मीट शॉप बन कर रह गई हो। अब कोई ये कहे कि खिलाडियों के बैठने को लेकर भला क्‍या झटका आईपीएल को लगा है। तो हुआ यूं है जनाब कि न्‍यूलैंडस जहां पर आईपीएल के शुरूआती मैच खेले जाने हैं वहां मौजूद सूइटस के सदस्‍यों ने कह दिया है कि वह अपनी जगह खाली नहीं करेंगे। तो भला फिर आपके और हमारे आईपीएल खिलाडी मैदान की सूखी और गीली घास को अपनी बैठने की जगह बनाएंगे क्‍या।

सवाल तो बडा होने के साथ साथ चुनौतीपूर्ण भी है। सूइटस का ख्‍वाब दिखाने वाली आईपीएल के सामनें तो यह नाक कटनें जैसी स्थिति हो गई है। आखिर करे तो क्‍या करे। मगर यदि कोई हमसे पूछे तो हम तो उन सदस्‍यों के ही साथ हैं भई। आखिर कुर्सी का मामला है। भला कोई कैसे छोड दे। कुर्सी है तो सब कुछ है कुर्सी नहीं तो कुछ भी नहीं। आईपीएल ने आज कुर्सी मांगी है कल पता नहीं क्‍या मांग ले, कहना मुश्किल है।

हालाकि मोदी साहब ने अब ने वहां के सदस्‍यों को सूइट खाली करने के लिये कुछ ख्‍वाब दिखाने शुरू कर दिये हैं। वो कहते हैं कि आप टैंट में बैठ जाओ हम तुम्‍हें टिकटें भी फ्री दे देंगे। इसके अलावा खाना भी मुफत मिलेगा। ऐसा लग रहा है कि जैसे भारत में होने वाली किसी रैली में भीड को जुटाने की मंशा से यह बातें कही जा रही हैं। क्‍या आपको ऐसा नहीं लगता है। अब तो खिलाडियों की स्थिति पर एक ताजा तरीन शेर याद आने लगा है। वो कुछ ऐसा है कि फुटपाथ हर सडक का है आशियां हमारा, रहने को घर नहीं है सारा जहां हमारा। देखते हैं कि कुर्सी का यह मामला आखिर किस तरफ जाता है। जैसे भारत में सभी चुनाव के दौरान दूसरे की कुर्सी खींचने में लगे हैं वैसा ही कुछ हाल इन दिनों न्‍यूलैंडस के स्‍टेडियम में चल रहा है। मानों मोदी कह रहें हो यह कुर्सी हमका दे ठाकुर। फिलहाल तो हमारी निगांहें भी इनकी कुर्सी मामले पर है आप भी जरूर निगाह रखियेगा। 

यदि आपको कुछ और लेख पढने हों तो आप मेरे दूसरे ब्‍लॉग www.cricketmerijan.blogspot.com पर जाकर भी पढ सकते हैं ा 

Thursday, April 9, 2009

अब पप्पू की लाज बचाने को सामनें आई है आईपीएल पार्ट टू


आईपीएल से भले ही कुछ विवाद जुडें हों मगर आईपीएल पार्ट टू ने एक काम तो बडा ही अच्‍छा किया है और वह है कि इसनें पप्‍पूओं की लाज रख ली है। अब पप्‍पू सीना ठोक कर चलने के काबिल हो गया है, नहीं तो सभी ने पप्‍पू की जान ले ली थी। उसका जीना मुश्किल कर दिया। घर से बाहर निकलने के लिये भी उसको कई बार सोचना पडता था। इस नेक काम के लिये आईपीएल पार्ट टू का धन्‍यवाद।
कमल कान्‍त वर्मा
पप्‍पू आज इतना फैमस हो गया है कि जहां देखो पप्‍पू का ही जिक्र चल रहा है। अखबार के पन्‍ने हों या फिर टीवी की ऐड सभी में पप्‍पू घुस गया है। मगर सच मानों तो अब मेरा भी मन है कि मैं भी पप्‍पू ही बन जाऊं। अरे पप्‍पू वोट नहीं देता है तो क्‍या हुआ आखिर पप्‍पू अब पप्‍पू तो नहीं रहा है। पप्‍पू तो अब सचिन भी है और द्रविड भी, और बाकी टीम प्‍लेयर भी। आपको नहीं पता है क्‍या इस बात का। अरे भई अब वो दिन दूर नहीं है जब आईपीएल पार्ट टू खेल रहे सारे खिलाडियों को अपने नाम के पीछे पप्‍पू का तमगा लगाना पडेगा क्‍योंकि वह इस बार लोकसभा चुनाव में अपना वोट नहीं डाल पाएंगे। बेचारे ना चाहते हुए भी पप्‍पू बन गए।

मगर अब पप्‍पू बनने पर किसी को कोई अफसोस नहीं होगा। पहले जरूर होता था। पिछले एक या फिर दो साल से जिस तरह से पप्‍पू को बदनाम करने की सोची समझी साजिश रची गई वह तरकीब अब बेकार हो गई है। भला हो इस आईपीएल का जिसनें इन पप्‍पूओं की लाज रख ली। अब तो पप्‍पू बेधडक बाहर निकलकर आएंगे और कहेंगे कि हम पप्‍पूओं कि फैरिस्‍त में अब दुनिया के बेहतरीन क्रिकेट खिलाडी शामिल हो गए हैं। भला यह तो कोई बात नहीं हुई कि चुनाव में पप्‍पू के नाम को ही उछालना शुरू कर दिया कि पप्‍पू वोट नहीं देता, क्‍या आप पप्‍पू बनना चाहोगे। अब कोई कह कर देखे। अरे पप्‍पू वोट नहीं देता है तो क्‍या हुआ।

आखिर पप्‍पू की भी तो कोई इज्‍ज्‍त है। अब किसी को पप्‍पू की इज्‍जत उतारने का कोई हक नहीं है। अब कोई कह कर देखे तो अब तो पप्‍पू पूरी तरह से सिक्‍योर है। क्‍योंकि उसके साथ में भारतीय क्रिकेट टीम के कई बडे नाम जुड गए हैं। यह सारे नाम ऐसे हैं जो हजारों हजार लोगों के लिये एक आर्दश हैं। इसलिये अब पप्‍पू पप्‍पू नहीं रहा है। और वैसे भी तुम्‍हें पता होना चाहिए कि पूरे भारत में कोई एक पप्‍पू नहीं है लाखों पप्‍पू हैं। तभी तो हर बार वोट का प्रतिशत लगातार घट रहा है फिर पप्‍पू को ही क्‍यों बदनाम करते हो भैयया। हम तो एक बात जानते हैं और वो यह है कि पप्‍पू के मन की तो किसी ने नहीं सोची। ना उन्‍होंने जो पप्‍पू को यूं बदनाम कर रहे हैं और ना ही हमारे माननीय चुनाव आयोग ने। यदि ऐसा होता तो भला वह इन पप्‍पूओं को पप्‍पू बनने से रोकने के लिये पहल नहीं करता क्‍या। एक सवाल और यहां पर बार बार मेरे जहन में कबडडी खेल रहा है कि आखिर क्‍या देश में होने वाले चुनाव क्रिकेट बल्‍ले से इतने बौने हो गए कि इस बात की चिंता किसी ने नहीं करी कि लाखों लोगों के ये आदर्श क्रिकेट स्‍टार भला इसमें शामिल कैसे होंगे। नहीं सोची है तो जाने दो जो हुआ अच्‍छा हुआ। हमारे लिये इतना ही काफी है कि आईपीएल पार्ट टू ने पप्‍पूओं की लाज रख ली।

Friday, September 26, 2008

वर्ल्‍ड कप को वो आखिरी ओवर

आईसीसी के टी-20 वर्ल्‍डकप की जीत को एक साल पूरा हो गया है। मगर इस मैच की याद आज भी भारत और पाकिस्‍तान के क्रिकेट प्रेमियों के जहन में ताजा है। मिसबाह को आज भी टी-20 फाइनल का वो आखिरी ओवर याद है। एक कैच ने इस मैच का रूख ही पलट कर रख दिया।

कमल कान्‍त वर्मा
टी-20 का वर्ल्‍ड कप फाइनल और आमने सामने चित परीचित अंदाज में भिडने वाली भारत और पाकिस्‍तान की टीमें। यह शाम इस वर्ल्‍ड कप के लिये बेहद अहम थी। पाकिस्‍तान जीत से सिर्फ 12 रन दूर था। मैच का आखिरी ओवर और खिलाडियों के साथ-साथ दर्शकों के माथे पर लकीरें साफ दिखाई दे रहीं थीं। किसी के हाथ भारत की जीत के लिये उठे तो किसी के पाकिस्‍तान की जीत के लिये। जोहन्‍सबर्ग के इस स्‍टेडियम ने दर्शकों में इतना उतावला पन शायद पहले कभी नहीं देखा हो। क्रीज पर मिसबाह-उल-हक के साथ दूसरे छोर पर मो. आसिफ डटे थे। जीतने का जज्‍बा पूरी तरह से दोनों खिलाडि़यों में दिखाई दे रहा था। वहीं महेन्‍द्र सिंह धोनी आखिरी को इस आखिरी समय में एक अदद अच्‍छे गेंदबाज की जरूरत थी। मिसबाह काफी हद तक जानते थे कि धोनी के पास जोगिंदर सिंह एक विकल्‍प के तौर पर मौजूद है। आखिरी ओवर में 12 रन की जरूरत को पूरा करने के लिये मिसबाह स्‍ट्राइक लेने के लिये पूरी तरह से तैयार थे।

जोगिंदर सिंह अपने ओवर की पहली गेंद फेंकी तो मिसबाह कुछ बीट हुए। इस गेंद के साथ दर्शकों की सांसे कुछ देर के लिये रूकी हुई थीं। धोनी के ज्‍यादातर फील्‍डर बाउंडरी की तरफ निगाह लगाए बैठे थे। जोगिंदर सिंह की दूसरी बॉल के साथ मिसबाह ने पूरी जान से बॉल को खिलाडियों के उपर से उठाकर बाउंडरी के बाहर फेंक दिया। मिसबाह के इस एक शॉट ने भारतीय खेमे में खलबली पैदा कर दी। जहां पाकिस्‍तान के प्रशंशक खुशी से उछल पड़े, तो वहीं भारतीय समर्थकों के चेहरे पर तनाव की लकीरें साफ दिखाई दे रहीं थीं। धोनी ने एक बार फिर जोगिंदर से बात की और अपनी पॉजीशन पर चले गए। जोगिंदर की तीसरी गेंद ने एक बार फिर से भारत की उम्‍मीदों पर पानी फेर दिया। यह बॉल वाईड थी। एक रन के इजाफे ने एक बार फिर से भारत की धडकनें तेज कर दीं। आखिरी ओवर ने वर्ल्‍ड कप के इस फाइनल को बेहद रोमांचक बना दिया था। भारतीय टीम की निगाह मिसबाह पर लगी थी। भारत को तो विकेट चाहिए था या फिर उनके लिये जरूरी था कि बाकी बची गेंदों पर कोई रन ना बन सके। पाकिस्‍तान को जीतने के लिये अब महज पांच रन चाहिए थे।

आखिरी ओवर की तीन बॉल फेंकी जानी बाकी थी। मिसबाह स्‍ट्राइक पर एक बार फिर से अपने आक्रामक मूंड में दिखाई दे रहे थे। जोगिंदर ने अपनी बॉल के लिये दौडना शुरू किया एक बार फिर से धड़कनों का उफान तेज हो गया था। जब तक बॉल ने क्रिज पर टप्‍पा खाया मिसबाह अपनी पॉजीशन मे आ गए थे। मिसबाह ने गेंद को फाईनलेग से स्‍कूप करने के प्रयास किया तो वह उनकी सोच से ज्‍यादा उपर बल्‍ले पर आ गई। नतीजा यह हुआ कि गेंद एक बार फिर से विकेट के पीछे उंची उछल गई। वहां विकेट के पीछे फाईन लेग पर मौजूद श्रीसंत ने इसको आसानी से अपने हाथों में ले लिया। इस एक कैच ने भारत को जहां जीत दिला दी तो वहीं पाकिस्‍तान को पहले टी-20 विश्‍व कप में हार देखनी पड़ी। श्रीसंत के हाथों में कैच जाने से पहले मिसबाह अपना दूसरा रन पूरा करने वाले थे। जैसे ही श्रीसंत के हाथों में बॉल पड़ी वहीं मिसबाह अपने को रोक नहीं पाए। इस कैच के साथ ही मिसबाह अपने बल्‍ले के सहारे पूरी क्रीज पर अकेले बेहद मायूस दिखाई दे रहे थे।

दूसरे छोर पर मौजूद आसिफ, मिसबाह के पास पहुंचे और उन्‍हें दिलासा दी। इस एक शॉट ने पाकिस्‍तान की किस्‍मत ही बदल कर रख दी। धोनी ने इस मैच के साथ अपनी कप्‍तानी को मजबूती दी। मिसबाह को अपने इस शॉट की उम्‍मीद नहीं थी। यह शॉट मिसबाह के लिये कभी ना भूलने वाला शॉट रहा। हाल ही में दिल्‍ली में हुए सुई नोर्दन गैस और दिल्‍ली के बीच हुए मैच के दौरान मिसबाह ने यह बात मानी कि यह शॉट उनके जीवन का ना भूलने वाला शॉट रहा। मगर मिसबाह को इस शॉट को लेने के लिये टीम के किसी सदस्‍य ने उन्‍हें दोष नहीं दिया। इस वर्ल्‍डकप को जीतने के साथ ही भारत ने अपने को वर्ल्‍ड चैंपियन बनाने का सपना भी संजो लिया।