Wednesday, April 4, 2012
भारतीय नौसेना को मिली आईएनएस चक्र
Wednesday, April 15, 2009
झटके पे झटका, झटके पे झटका आखिर कब तक

कमल कान्त वर्मा
झटके पे झटका झटके पे झटका आखिर कब तक। आईपीएल को तो अपने नए सीजन में पता नहीं कितने ही झटके सहनें होंगे। पहले जगह बदलने का झटका, फिर पाकिस्तानी खिलाडियों को हटाने का झटका, कभी उनके चुनौती देने का झटका। और इन सभी से निजाद मिली तो अब स्टेडियम मै बैठने का ही झटका आईपीएल को लग गया। ये जोर का झटका घीरे से आखिर कब तक लगता रहेगा। आखिर इस आईपीएल को कब तक सहन करने होंगे ये झटके। इतने झटकों से ऐसा लग रहा है जैसे आईपीएल 2 झटका मीट शॉप बन कर रह गई हो। अब कोई ये कहे कि खिलाडियों के बैठने को लेकर भला क्या झटका आईपीएल को लगा है। तो हुआ यूं है जनाब कि न्यूलैंडस जहां पर आईपीएल के शुरूआती मैच खेले जाने हैं वहां मौजूद सूइटस के सदस्यों ने कह दिया है कि वह अपनी जगह खाली नहीं करेंगे। तो भला फिर आपके और हमारे आईपीएल खिलाडी मैदान की सूखी और गीली घास को अपनी बैठने की जगह बनाएंगे क्या।
सवाल तो बडा होने के साथ साथ चुनौतीपूर्ण भी है। सूइटस का ख्वाब दिखाने वाली आईपीएल के सामनें तो यह नाक कटनें जैसी स्थिति हो गई है। आखिर करे तो क्या करे। मगर यदि कोई हमसे पूछे तो हम तो उन सदस्यों के ही साथ हैं भई। आखिर कुर्सी का मामला है। भला कोई कैसे छोड दे। कुर्सी है तो सब कुछ है कुर्सी नहीं तो कुछ भी नहीं। आईपीएल ने आज कुर्सी मांगी है कल पता नहीं क्या मांग ले, कहना मुश्किल है।
हालाकि मोदी साहब ने अब ने वहां के सदस्यों को सूइट खाली करने के लिये कुछ ख्वाब दिखाने शुरू कर दिये हैं। वो कहते हैं कि आप टैंट में बैठ जाओ हम तुम्हें टिकटें भी फ्री दे देंगे। इसके अलावा खाना भी मुफत मिलेगा। ऐसा लग रहा है कि जैसे भारत में होने वाली किसी रैली में भीड को जुटाने की मंशा से यह बातें कही जा रही हैं। क्या आपको ऐसा नहीं लगता है। अब तो खिलाडियों की स्थिति पर एक ताजा तरीन शेर याद आने लगा है। वो कुछ ऐसा है कि फुटपाथ हर सडक का है आशियां हमारा, रहने को घर नहीं है सारा जहां हमारा। देखते हैं कि कुर्सी का यह मामला आखिर किस तरफ जाता है। जैसे भारत में सभी चुनाव के दौरान दूसरे की कुर्सी खींचने में लगे हैं वैसा ही कुछ हाल इन दिनों न्यूलैंडस के स्टेडियम में चल रहा है। मानों मोदी कह रहें हो यह कुर्सी हमका दे ठाकुर। फिलहाल तो हमारी निगांहें भी इनकी कुर्सी मामले पर है आप भी जरूर निगाह रखियेगा।
यदि आपको कुछ और लेख पढने हों तो आप मेरे दूसरे ब्लॉग www.cricketmerijan.blogspot.com पर जाकर भी पढ सकते हैं ा
Thursday, April 9, 2009
अब पप्पू की लाज बचाने को सामनें आई है आईपीएल पार्ट टू

कमल कान्त वर्मा
पप्पू आज इतना फैमस हो गया है कि जहां देखो पप्पू का ही जिक्र चल रहा है। अखबार के पन्ने हों या फिर टीवी की ऐड सभी में पप्पू घुस गया है। मगर सच मानों तो अब मेरा भी मन है कि मैं भी पप्पू ही बन जाऊं। अरे पप्पू वोट नहीं देता है तो क्या हुआ आखिर पप्पू अब पप्पू तो नहीं रहा है। पप्पू तो अब सचिन भी है और द्रविड भी, और बाकी टीम प्लेयर भी। आपको नहीं पता है क्या इस बात का। अरे भई अब वो दिन दूर नहीं है जब आईपीएल पार्ट टू खेल रहे सारे खिलाडियों को अपने नाम के पीछे पप्पू का तमगा लगाना पडेगा क्योंकि वह इस बार लोकसभा चुनाव में अपना वोट नहीं डाल पाएंगे। बेचारे ना चाहते हुए भी पप्पू बन गए।
Friday, September 26, 2008
वर्ल्ड कप को वो आखिरी ओवर
कमल कान्त वर्मा
जोगिंदर सिंह अपने ओवर की पहली गेंद फेंकी तो मिसबाह कुछ बीट हुए। इस गेंद के साथ दर्शकों की सांसे कुछ देर के लिये रूकी हुई थीं। धोनी के ज्यादातर फील्डर बाउंडरी की तरफ निगाह लगाए बैठे थे। जोगिंदर सिंह की दूसरी बॉल के साथ मिसबाह ने पूरी जान से बॉल को खिलाडियों के उपर से उठाकर बाउंडरी के बाहर फेंक दिया। मिसबाह के इस एक शॉट ने भारतीय खेमे में खलबली पैदा कर दी। जहां पाकिस्तान के प्रशंशक खुशी से उछल पड़े, तो वहीं भारतीय समर्थकों के चेहरे पर तनाव की लकीरें साफ दिखाई दे रहीं थीं। धोनी ने एक बार फिर जोगिंदर से बात की और अपनी पॉजीशन पर चले गए। जोगिंदर की तीसरी गेंद ने एक बार फिर से भारत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। यह बॉल वाईड थी। एक रन के इजाफे ने एक बार फिर से भारत की धडकनें तेज कर दीं। आखिरी ओवर ने वर्ल्ड कप के इस फाइनल को बेहद रोमांचक बना दिया था। भारतीय टीम की निगाह मिसबाह पर लगी थी। भारत को तो विकेट चाहिए था या फिर उनके लिये जरूरी था कि बाकी बची गेंदों पर कोई रन ना बन सके। पाकिस्तान को जीतने के लिये अब महज पांच रन चाहिए थे।
आखिरी ओवर की तीन बॉल फेंकी जानी बाकी थी। मिसबाह स्ट्राइक पर एक बार फिर से अपने आक्रामक मूंड में दिखाई दे रहे थे। जोगिंदर ने अपनी बॉल के लिये दौडना शुरू किया एक बार फिर से धड़कनों का उफान तेज हो गया था। जब तक बॉल ने क्रिज पर टप्पा खाया मिसबाह अपनी पॉजीशन मे आ गए थे। मिसबाह ने गेंद को फाईनलेग से स्कूप करने के प्रयास किया तो वह उनकी सोच से ज्यादा उपर बल्ले पर आ गई। नतीजा यह हुआ कि गेंद एक बार फिर से विकेट के पीछे उंची उछल गई। वहां विकेट के पीछे फाईन लेग पर मौजूद श्रीसंत ने इसको आसानी से अपने हाथों में ले लिया। इस एक कैच ने भारत को जहां जीत दिला दी तो वहीं पाकिस्तान को पहले टी-20 विश्व कप में हार देखनी पड़ी। श्रीसंत के हाथों में कैच जाने से पहले मिसबाह अपना दूसरा रन पूरा करने वाले थे। जैसे ही श्रीसंत के हाथों में बॉल पड़ी वहीं मिसबाह अपने को रोक नहीं पाए। इस कैच के साथ ही मिसबाह अपने बल्ले के सहारे पूरी क्रीज पर अकेले बेहद मायूस दिखाई दे रहे थे।
दूसरे छोर पर मौजूद आसिफ, मिसबाह के पास पहुंचे और उन्हें दिलासा दी। इस एक शॉट ने पाकिस्तान की किस्मत ही बदल कर रख दी। धोनी ने इस मैच के साथ अपनी कप्तानी को मजबूती दी। मिसबाह को अपने इस शॉट की उम्मीद नहीं थी। यह शॉट मिसबाह के लिये कभी ना भूलने वाला शॉट रहा। हाल ही में दिल्ली में हुए सुई नोर्दन गैस और दिल्ली के बीच हुए मैच के दौरान मिसबाह ने यह बात मानी कि यह शॉट उनके जीवन का ना भूलने वाला शॉट रहा। मगर मिसबाह को इस शॉट को लेने के लिये टीम के किसी सदस्य ने उन्हें दोष नहीं दिया। इस वर्ल्डकप को जीतने के साथ ही भारत ने अपने को वर्ल्ड चैंपियन बनाने का सपना भी संजो लिया।












